सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी की स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। हालांकि, 15 दिन की मौजूदा सीमा से अधिक रखी जाने वाली चीनी की मात्रा केवल एडवांस ऑथराइजेशन योजना और टैरिफ रेट कोटा के तहत आयात की गई चीनी से ही पूरी करनी होगी।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खुले बाजार से खरीद के लिए स्टॉक सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। खुले बाजार से चीनी की खरीद 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी। यह निर्णय सरकार द्वारा चीनी के प्रमुख थोक उपभोक्ताओं के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य थोक उपभोक्ताओं के हितों और घरेलू चीनी बाजार में स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना है। इससे आगामी त्योहारी सीजन के दौरान वास्तविक औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
एक्स-मिल कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट
सरकार के अनुसार, खुदरा चीनी कीमतों में उनके उच्चतम स्तर की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मिल स्तर पर चीनी की एक्स-मिल कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने कहा कि खुदरा कीमतों में अपेक्षाकृत धीमी गिरावट से संकेत मिलता है कि एक्स-मिल कीमतों में कमी का पूरा लाभ अभी आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने आज भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA), राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ और चीनी व्यापार से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक में कहा कि एक्स-मिल कीमतों में आई कमी का पूरा असर अभी खुदरा कीमतों में दिखाई नहीं दे रहा है।
व्यापारियों से उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचाने की अपील
सरकार ने चीनी व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं से अपील की है कि एक्स-मिल कीमतों में हुई महत्वपूर्ण कमी का लाभ तत्काल उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। सरकार ने कहा कि खुदरा कीमतों में कमी मिल स्तर पर हुई गिरावट के अनुरूप होनी चाहिए।
साथ ही, पूरी चीनी आपूर्ति श्रृंखला से सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है कि आगामी त्योहारी सीजन में चीनी और चीनी से बने उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतों पर उपलब्ध रहें।
किसानों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन
मंत्रालय ने कहा कि सरकार लगातार गन्ना किसानों के हितों और उपभोक्ताओं के लिए चीनी की स्थिर एवं उचित कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए काम कर रही है। अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होने वाले नए चीनी सीजन के साथ गन्ना किसानों को 365 रुपये प्रति क्विंटल का बढ़ा हुआ उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) मिलेगा।
सरकार हर वर्ष एफआरपी में वृद्धि कर रही है, ताकि गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके और चीनी क्षेत्र में संतुलन भी बना रहे। मंत्रालय ने कहा कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखी जाएगी तथा उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त उपलब्धता के साथ खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उद्योगों की जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
