प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ कार्यक्रम में देशभर के युवा एथलीटों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों और ‘मेरा युवा भारत’ के लाखों स्वयंसेवकों को बधाई दी।
मेजर ध्यानचंद को किया याद
राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने करीब 100 वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे का उल्लेख किया, जिसमें मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की नींव रखने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। उन्होंने हाल की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भी मेजर ध्यानचंद को याद करने का उल्लेख किया।
खेलों को विकसित भारत के अभियान से जोड़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से रखे गए अपने स्पोर्ट्स विजन का जिक्र करते हुए कहा कि खेलों का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं है। खेल भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति को जोड़कर विकसित भारत के निर्माण का माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि इससे उसके परिवार, स्कूल, जिले और राज्य का गौरव भी बढ़ता है। खिलाड़ी की सफलता के साथ दुनिया उसके क्षेत्र और वहां की प्रतिभा को भी पहचानने लगती है।
ओलंपिक में भागीदारी बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने ओलंपिक में भारत की सीमित भागीदारी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में शामिल कई खेलों में भारत की उपस्थिति अभी भी नहीं है। वर्ष 2012 के ओलंपिक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने उस समय केवल 13 खेलों में हिस्सा लिया था।
उन्होंने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास वॉटर और विंटर स्पोर्ट्स के लिए आवश्यक जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। इसके बावजूद इन खेलों में देश की मजबूत उपस्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में उन खेलों की पहचान करनी होगी, जिनमें स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।
2036 ओलंपिक के लिए आज से तैयारी
प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों को लेकर कहा कि आज से ही उन खिलाड़ियों को तैयार करना होगा, जो उस समय भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके लिए 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान करने के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल बच्चे की रुचि को आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वह किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से अधिक उपयुक्त है। इसके आधार पर बच्चों को प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रधानमंत्री ने सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार 21वीं सदी के भारत के लिए आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने को प्रतिबद्ध है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे उच्चतम स्तर तक पहुंचाने तक पूरा सहयोग मिल सके।
उन्होंने कहा कि भारत अन्य देशों के साथ खेल सहयोग को भी लगातार मजबूत कर रहा है, ताकि भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकें।
युवाओं के सुझावों को मिलेगा महत्व
प्रधानमंत्री ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ को केवल खेलों पर चर्चा का मंच नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों और देश की खेल संबंधी आकांक्षाओं को जोड़ने वाला मंच बताया। उन्होंने कहा कि खेल इकोसिस्टम, प्रतिभा विकास और खेल प्रशासन से जुड़े विषयों पर युवाओं के सुझावों को सुना जाएगा और उपयोगी विचारों को नीतियों में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
पैरा एथलीटों को बताया प्रेरणा का स्रोत
प्रधानमंत्री ने खेल भावना और संघर्ष की क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल व्यक्ति को जीत के साथ-साथ हार के बाद दोबारा उठने और लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने पैरा एथलीटों को इसका बेहतरीन उदाहरण बताया और शीतल, अवनी लेखड़ा, सुमित अंतिल, नितेश कुमार और झंडू कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख किया।
फौजा सिंह का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल बेहतर जीवन और फिटनेस की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रहने और मजबूत इच्छाशक्ति विकसित करने में भी मदद करते हैं।
‘प्ले ग्राउंड’ को ‘प्ले स्टेशन’ से अधिक महत्व देने का संदेश
प्रधानमंत्री ने समाज में खेलों को लेकर बदलते नजरिए की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज लोग रेस, योग, पिकल बॉल और बैडमिंटन जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से खेलों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्क्रीन से अधिक खेल केंद्रों और प्ले स्टेशन से अधिक प्ले ग्राउंड को महत्व दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है। खेल के मैदान से लेकर समाज के अन्य क्षेत्रों तक युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की ताकत बनेगी।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल विज्ञान, खेल मनोविज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
